गीत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
गीत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 9 फ़रवरी 2022

शबनम जैसा तेरा होना

शबनम जैसा

तेरा होना,

पल भर रहकर

गुम हो जाना।

 

आँखों में बसता

रूप तुम्हारा,

उससे पहले

ओझल हो जाना।

 

रोक सके ना

देख सके ना,

बढ़ते हाथों का

थम-थम जाना।

 

अंक में भर लूँ 

अपना कह लूँ,

एक हसरत का

हसरत रह जाना।

 

चंचल चितवन

दिल की धड़कन,

आस लगाए

कब होगा आना।

 

स्वप्न दिखाती

फिर आओगी,

फिर टूटेगा

स्वप्न सुहाना।


शुक्रवार, 22 मई 2020

हम ही जीतेंगे कह दो ये सबसे मगर - कविता

फूल खिलने लगे गुलशन के मगर,
फूल गुमसुम हैं कितने घर के मगर.
कौन आया जहाँ में ये हलचल हुई.
आज डरने लगे लोग खुद से मगर.


दौड़ती-भागती ज़िन्दगी है थमी,
न आये समझ क्या गलत क्या सही.
सबकी आँखों में कितने सवालात हैं,
उनके उत्तर नहीं हैं मिलते मगर. 



लोग हैरान हैं और परेशान हैं,
खोजते मिलके कोई समाधान हैं.
एक पल में अँधेरा ये छंट जाएगा,
दीप विश्वास के रहें जलते मगर.

जिनकी कोशिश कोई साँस टूटे नहीं,
हम सब संग हैं वे अकेले नहीं.
है लड़ाई अनजान अदृश्य से,
हम ही जीतेंगे कह दो ये सबसे मगर.


.
#हिन्दी_ब्लॉगिंग 

रविवार, 17 जून 2018

वो दर्द सीने में आज भी है जिन्दा


वो दर्द सीने में आज भी है जिन्दा.

हाँ, लड़की हूँ मैं तुम्हें इससे क्या,
हैं मेरे भी कुछ सपने तुम्हें इससे क्या,
तुम्हारे लिए तो महज एक देह थी,
शारीरिक सौन्दर्य की मूर्ति भर थी,
तुम्हारी चाह मैं नहीं मेरा शरीर था,
वो दर्द सीने में आज भी है जिन्दा.

तुम्हारे इजहार पर मेरा इकरार नहीं,
इंकार करना कोई बड़ा अपराध नहीं,
तुम्हारी हाँ से मेरी हाँ मिल न सकी,
मेरी न की तुमने कीमत न समझी,
प्यार नहीं तुम्हारा था एक धोखा,
वो दर्द सीने में आज भी है जिन्दा.

प्यार की आड़ में तेजाब दिया तुमने,
चेहरा बिगाड़ रूप मिटाया तुमने,
खुशियों पर जलता अँधेरा फैला गए,
सपनों को मेरी चीखों में मिटा गए,
हर चीख पर तुमने अट्टहास किया,
वो दर्द सीने में आज भी है जिन्दा.

सुनो गौर से न हूँ कमजोर न लाचार,
थाती मेरा आत्मसम्मान और विश्वास,
सुन्दरता तन की खो गई हो भले,
मन ने फिर सपनों के आकाश बुने,
उस आकाश में अब है उन्मुक्त उड़ना,
वो दर्द सीने में आज भी है जिन्दा.

विराट अभिमानी वजूद को क्या जानोगे,
उसकी विशालता को किसी दिन मानोगे,
अब किसी नकार पर चीख न गूँजेगी,
कोई और बेटी तेजाब में न झुलसेगी,  
दर्द को पीकर दर्द से सीखा है लड़ना,
वो दर्द सीने में आज भी है जिन्दा.


++
कुमारेन्द्र किशोरीमहेन्द्र
17-06-2018

सोमवार, 31 अक्टूबर 2016

ओ भारतमाता के प्रहरी, है तुमको बारम्बार नमन

ओ भारतमाता के प्रहरी,
है तुमको बारम्बार नमन.

अडिग हिमालय है तुमसे,
तुमसे सागर में गहराई.
धरती की व्यापकता तुमसे,
तुमसे अम्बर की ऊँचाई.
ओ भारतमाता के प्रहरी,
है तुमको बारम्बार नमन.

तुमसे मुस्काता है बचपन,
तुमसे इठलाती है तरुणाई.
शौर्य तुम्हारा नस-नस में,
भर ले ज़र्रा-ज़र्रा अंगड़ाई.
ओ भारतमाता के प्रहरी,
है तुमको बारम्बार नमन.

तीन रंग की आज़ादी,
है लाल किले पर लहराई.
तुमसे है सम्मान, सबल,
है गरिमा भी तुमसे पाई.
ओ भारतमाता के प्रहरी,
है तुमको बारम्बार नमन.

जय वीरों की, जय सेना की,
देता है जयघोष सुनाई.
जले दीप से दीप कई तो,
देश है देता संग दिखाई.
ओ भारतमाता के प्रहरी,
है तुमको बारम्बार नमन.


शनिवार, 25 जुलाई 2015

तेरी चाहत में मेरा हाल कुछ ऐसा हुआ हमदम

गँवारा है न इन आँखों को, तुम्हारा दूर हो जाना,
मचलना धड़कनों का और सांसों का बहक जाना.
तेरी चाहत में मेरा हाल कुछ ऐसा हुआ हमदम,
न देखूं तो परेशानी, मिलो तो आये शरमाना.

तुम आओ आ भी जाओ अब, न मुझको सताओ अब,
भरो बांहों में तुम अपनी, गले अपने लगाओ अब.
तेरी चाहत में मेरा हाल कुछ ऐसा हुआ हमदम,
रहकर तुमसे दूर मुश्किल है इस दिल को समझाना.

घटायें बरसी हैं या फिर मेरे आंसू के धारे हैं,
मेरी हालत पर गुमसुम ये चंदा और सितारे हैं.
तेरी चाहत में मेरा हाल कुछ ऐसा हुआ हमदम,
मुझे रोना ही आया है, जब भी चाहा मुस्काना.

मिले हो आज वर्षों में, सदियों तक संग रहना,
विरहिणी के मरुस्थल में बन सावन बरस जाना.
तेरी चाहत में मेरा हाल कुछ ऐसा हुआ हमदम,
तुम्हीं पर जिंदगी अपनी, तुम्हीं पर मुझे है मिट जाना.

++++++++ 
कुमारेन्द्र किशोरीमहेन्द्र 
22-07-2015