सोमवार, 4 अप्रैल 2022

मिल कर बिछड़ने से डरता हूँ

तुम न आओ,

इस तरह पास मेरे,

नहीं हिम्मत

अब खोने की

पास मेरे,

आज पास हो तुम

लेकिन

कल को चले जाओगे दूर

यकीं है हमें,

दिल को कितनी ही बार

समझाया है मगर

अब न समझेगा

यकीं है हमें,

ये सच है कि

तुम्हारा पास होना

देता है ख़ुशी दिल को,

देता है सुकून मन को

पर डरता है साथ ही

ये दिल भी,

ये मन भी,

पता नहीं किस पल तुम

कह दो आकर अलविदा,

पता नहीं किस पल तुम

आ जाओ

छोड़ कर जाने को,

बस उसी पल से डरता हूँ,

उस पल से बचने को

आज

तुमसे मिलने से बचता हूँ,

फिर एक बार मिल कर

बिछड़ने से डरता हूँ. 




++

कुमारेन्द्र किशोरीमहेन्द्र

1 टिप्पणी:

Awaz ने कहा…

बहुत अच्छी है। अतीव सुंदर